Central Information Commission

हम कौन है

सूचना आयोग

केन्द्रीय सूचना आयोग का गठन कैसे किया जाता है?

  • केन्द्रीय सूचना आयोग का गठन केंद्र सरकार द्वारा एक गजट अधिसूचना के माध्यम से किया जाता है।
  • आयोग में शामिल हैं, 1 मुख्य सूचना आयुक्त (सी.आई.सी.)और 10 से अनधिक सूचना आयुक्त (आई.सी.), जो भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किए जाएंगे।
  • पद की शपथ, प्रथम अनुसूची में विहित प्रपत्र के अनुसार भारत के राष्ट्रपति द्वारा दिलाया जाएगा।
  • आयोग का मुख्यालय दिल्ली में होगा। केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से अन्य कार्यालय देश के अन्य भागों में स्थापित किए जा सकते हैं।

  • आयोग अपनी शक्तियों का प्रयोग किसी अन्य प्राधिकारी के निदेशों के अधीन रहे बिना करेगा। (धारा 12)

मुख्य सूचना आयुक्त / सूचना आयुक्त के पात्रता मापदंड क्या हैं और नियुक्ति प्रक्रिया क्या है?

  • मुख्य सूचना आयुक्त / सूचना आयुक्त पद के उम्मीदवारों को विधि, विज्ञान और प्रौद्योगिकी समाज सेवा, प्रबंध, पत्रकारिता, जनसंपर्क माध्यम, या प्रशासन तथा शासन का व्यापक ज्ञान और अनुभव रखने वाले जन जीवन में प्रख्यात व्यक्ति होना चाहिए।
  • मुख्य सूचना आयुक्त / सूचना आयुक्त संसद का सदस्य या किसी राज्य या संघ राज्य क्षेत्र के विधान-मंडल का सदस्य नहीं होगा। वह कोई अन्य लाभ का पद धारित नहीं करेगा या किसी राजनितिक दल से संबद्ध नहीं होगा अथवा कोई कारोबार नहीं करेगा या कोई वृति नहीं करेगा। (धारा 12)
  • नियुक्ति समिति में प्रधान मंत्री (अध्यक्ष), लोक सभा में विपक्ष के नेता और प्रधान मंत्री द्वारा नामनिर्दिष्ट संघ मंत्रिमंडल का एक मंत्री शामिल होते हैं।

मुख्य सूचना आयुक्त की पदावधि और अन्य सेवा शर्तें क्या हैं?

  • मुख्य सूचना आयुक्त, उस तारीख से, जिसको वह अपना पद ग्रहण करता है, पांच वर्ष के लिए या उसके 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, इनमे से जो भी पहले होता हो, नियुक्त किया जाएगा।
  • मुख्य सूचना आयुक्त पुनर्नियुक्ति का पात्र नहीं है।
  • वेतन मुख्य निर्वाचन आयुक्त के सामान होगा। मुख्य सूचना आयुक्त के सेवा के दौरान इसमें कोई अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जाएगा। (धारा 13)

सूचना आयुक्त की पदावधि और अन्य सेवा शर्तें क्या हैं?

  • सूचना आयुक्त, उस तारीख से, जिसको वह अपना पद ग्रहण करता है, पांच वर्ष के लिए या उसके 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, इनमे से जो भी पहले होता हो, पद धारण करेगा और सूचना आयुक्त के रूप में पुनर्नियुक्ति का पात्र नहीं होगा।
  • वेतन निर्वाचन आयुक्त के सामान होगा।सूचना आयुक्त के सेवा के दौरान इसमें कोई अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
  • सूचना आयुक्त, मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्ति के लिए पात्र है, लेकिन सूचना आयुक्त के रूप में उसके पदावधि को शामिल करते हुए, कुल पांच वर्ष से अधिक पद धारण नहीं करेगा। (धारा 13)

राज्य सूचना आयोग का गठन कैसे किया जाता है?

  • राज्य सूचना आयोग का गठन राज्य सरकार द्वारा एक गजट अधिसूचना के माध्यम से किया जाता है।इसमें शामिल हैं, 1 राज्य मुख्य सूचना आयुक्त (एस.सी.आई.सी.) और 10 से अनधिक राज्य सूचना आयुक्त (एस.आई.सी.), जो राज्यपाल द्वारा नियुक्त किए जाएंगे।
  • पद की शपथ, प्रथम अनुसूची में विहित प्रपत्र के अनुसार राज्यपाल द्वारा दिलाया जाएगा।
  • आयोग का मुख्यालय उस स्थान पर होगा में होगा, जिसे राज्य सरकार विनिर्दिष्ट करे। राज्य सरकार के अनुमोदन से अन्य कार्यालय राज्य के अन्य भागों में स्थापित किए जा सकते हैं।
  • आयोग अपनी शक्तियों का प्रयोग किसी अन्य प्राधिकारी के अधीन रहे बिना करेगा।

राज्य मुख्य सूचना आयुक्त / राज्य सूचना आयुक्त के पात्रता मापदंड क्या हैं और नियुक्ति प्रक्रिया क्या है?

नियुक्ति समिति की अध्यक्षता मुख्य मंत्री द्वारा की जाएगी। अन्य सदस्यों में विधान-सभा में विपक्ष के नेता और मुख्य मंत्री द्वारा नामनिर्दिष्ट मंत्रिमंडल का एक मंत्री शामिल हैं।

राज्य मुख्य सूचना आयुक्त / राज्य सूचना आयुक्त के रूप में नियुकित के लिए योग्यता वही होगी जो केन्द्रीय आयुक्तों के लिए है।

राज्य मुख्य सूचना आयुक्त का वेतन वही होगा, जो एक निर्वाचन आयुक्त का होता है।राज्य सूचना आयुक्त का वेतन वही होगा, जो राज्य सरकार के मुख्य सचिव का होता है। (धारा 15)

सूचना आयोगों की शक्तियां और कार्य क्या हैं?

  • केन्द्रीय सूचना आयोग / राज्य सूचना आयोगों को किसी भी ऐसे व्यक्ति से शिकायतों को प्राप्त करने का कर्तव्य है-
    • जो एक सूचना अनुरोध को दाखिल करने में समर्थ नहीं हैं, क्योंकि जन सूचना अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई है;
    • जिसे सूचना इंकार कर दी गई है, जो अनुरोध की गई थी;
    • निर्धारित समय सीमा में जिन्होनें अपने अनुरोध की गई सूचना के लिए कोई जवाब प्राप्त नहीं किया है;
    • जो सोचता है कि प्रभारित शुल्क अप्रासंगिक है;
    • जो सोचता है कि प्रदान की गई सूचना अधूरी या गलत या गुमराह करने वाली है; और
    • इस अधिनियम के अंतर्गत सूचना प्राप्त करने से संबंधित कोई अन्य मामला।
  • अगर प्रासंगिक आधार हैं, जांच के आदेश देने की शक्ति।
  • केन्द्रीय सूचना आयोग/ राज्य सूचना आयोगों के पास सिविल न्यायालय की शक्ति होगी, जैसे कि -
    • समन करना और व्यक्तियों कीउपस्थिति बाध्य करना, शपथ पर मौखिक या लिखित साक्ष्य देने के लिए और दस्तावेज या चीजें पेश करने के लिए विवश करना;
    • दस्तावेजों के प्रकटीकरण और निरीक्षण की अपेक्षा करना;
    • शपथपत्र पर साक्ष्य को अभिग्रहण करना;
    • किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी लोक अभिलेख या उसकी प्रतियां मंगाना;
    • साक्षियों या दस्तावेजों की परीक्षा के लिए समन जारी करना;
    • कोई अन्य विषय, जो विहित किए जाए।
  • इस अधिनियम के दायरे में आने वाले सभी अभिलेख (छूट के दायरे में आने वाले उन सभी अभिलेखों के साथ) जांच के दौरान परीक्षा हेतु केन्द्रीय सूचना आयुक्तों / राज्य सूचना आयुक्तों को प्रदान किए जाएंगे।
  • लोक प्रधाकारियों से अपने निर्णयों का अनुपालन सुनिश्चित करने की शक्ति में शामिल हैं -
    • एक निर्धारित प्रारूप में सूचना तक पहुंच उपलब्ध कराना;
    • लोक प्रधाकारियों को पी.आई.ओ./ ए.पी.आई.ओ. को नियुक्त करने का आदेश देना, जहां कोई भी मौजूद नहीं है;
    • सूचना या सूचना के प्रवर्गों को प्रकाशित करना;
    • अभिलेखों के अनुरक्षण, प्रबंध और विनाश से संबंधित पद्धतियों में आवश्यक परिवर्तन करना;
    • सूचना के अधिकार के संबंध में अधिकारीयों के प्रशिक्षण के उपबंधों को बढ़ाना;
    • इस कानून के अनुपालन पर लोक प्राधिकारियों से एक वार्षिक रिपोर्ट की मांग करना;
    • लोक प्राधिकारियों से आवेदक द्वारा सहन की गई किसी हानि या अन्य किसी नुकसान के लिए प्रतिपूरित करने की अपेक्षा करना;
    • इस अधिनियम के अधीन शास्ति अधिरोपित करना; और
    • आवेदन को नामंजूर करना। (धारा 18 और धारा 19)

रिपोर्टिंग प्रक्रिया क्या है?

  • वर्ष के अंत में केन्द्रीय सूचना आयोग केंद्र सरकार को इस कानून के प्रावधानों के कार्यान्वयन पर एक वार्षिक प्रतिवेदन भेजेगा। राज्य सूचना आयोग राज्य सरकार को एक प्रतिवेदन भेजेगा।
  • प्रत्येक मंत्रालय का यह कर्तव्य है कि वह अपने लोक प्राधिकारियों से प्रतिवेदन संकलित करे और और यथास्थिति, उसे केन्द्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग को भेजे।
  • प्रत्येक प्रतिवेदन में प्रत्येक लोक प्राधिकारी द्वारा प्राप्त किए गए अनुरोधों की संख्या, अस्वीकृति और अपीलों की संख्या, लिए गए अनुशासनात्मक कार्रवाई के विवरण, संगृहीत फीस और शुल्क आदि, का विवरण होगा।
  • प्रत्येक वर्ष के अंत के पश्चात् केंद्र सरकार केन्द्रीय सूचना आयोग के प्रतिवेदन को संसद के पटल पर रखेगी। संबंधित राज्य सरकार राज्य सूचना आयोग के प्रतिवेदन को विधान सभा (और जहां भी लागू है, विधान परिषद्) के पटल पर रखेगी। (धारा 25)